भगवद गीता हिंदी PDF २०२२ | Bhagavad gita pdf in hindi (Free)

गीता सार

Bhagavad gita pdf in hindi: “कृष्णम बंदे जगत गुरु”, नमस्कार, दोस्तों आप ने कई वेबसाइट में प्रबेश किआ होगा और काफी सारे जानकारी भी प्राप्त की होगी, लेकिन हमारे भारतीय संस्कृति हमारे धर्म ग्रंथों के बारे में लोगों को जड़ जानकारी नही है।

आज का मनुष्य अपने जीवन के बहु मूल्य समय केवल खुदके सुख शांति को खोजनेमें ब्यतीत कर देता है लेकिन फिर भी उसे शांति नही मिलती, वहीं दूरदर्शन में आने वाले कुछ नाटक मनुष्य को यह अवगत करता है कि हमारे धर्म मे कई कहानी है और वो सब सत्य है।

में धन्यबाद देता हूँ हमारे टेलीविज़न में आने वाले नाटक निर्माताओं को की उनके कारण कमसे कम हमारा धर्म ग्रंथ तो जीवित है नही तो यह सब कबका लुप्त हो गेय होता और आज का पीढ़ी भगवान जैसा किसी को पहचानता भी नही।

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिनको धर्म से बड़ा लगाव है और वो इसे पाना चाहते है इसमें डूबना चाहते है, और इसीलिए तो आज भी इंटरनेट पर Bhagavad gita PDF in Hindi सर्च किए जाते है।

तो अगर आप भी Bhagavad gita PDF in Hindi में पाना चाहते है और इसके बारे में जानना भी चाहते है तो आजका यह लेख आपके लिए है।

आज हम इस लेख के जरिये आपको Bhagavad gita pdf in hindi, Bhagavad gita in hindi PDF, Bhagavad gita क्बया है, Bhagavad gita quotes in hindi इत्यादि के बारे में बताने और समझने का प्रयाश करेंगे, तो बने रहें ईश लेख में।

Bhagavad gita kya hai?

Bhagavad gita pdf in hindi
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जो लोग भारतीय है और फिर भी इसके बारे में नही जानते है तो उनका भारतीय होना और न होना दोनों बराबर है, अपने ही धर्म को जानना और उसके बारे में खुद को अवगत करना यह हर नागरिक का ब्यक्तिगत कार्य होना चाहिए। [Bhagavad gita pdf in hindi]

मनुष्य जब कभी भी अपने जीवन से हर जाता है जब कभी आपको ऐसा लगे कि काश कोई ऐसा होता जिसके कंधे पर माथा रख कर अपना सारा दुख दर्द भूल सकूं, तो ऐसे में आपको Bhagavad gita का सहारा लेना चाहिए।

यह पुस्तक आपको खुद के अंदर छुपी वो बहुमूल्य रत्न की पहचान कराएगा, यह आपके अंदर छुपी वो रोशनी का पता बताएगा जो सदैव कोमल है सदैव निस्पापी है अजन्मा और अजर है।

भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि आत्मा अमर है जिसे कोई नही मार सकता, और यह ताकतवर होने के साथ साथ कोमल भी है भगवान का अंश है जिसकी कोई समय निर्फ़हरित नही है।

सरीर मार जाती है नस्ट जो जाती है लेकिन आत्मा कभी नही मरती, आत्मा फिर से नया रूप धारण करता है और फिर से अपने कर्म में लग जाता है।

अगर आपको यह सब कुछ जानना है तो भगवद गीता ही एक मात्र ऐसा पुस्तक है जो आपको पढ़ना चाहिए समझना चाहिए। [Bhagavad gita pdf in hindi]

भगवद गीता वेद ब्याश द्वारा लिखी गेई एक धार्मिक ग्रंथ है जिसमे सारे जीव जगत का ब्याख्या मिलता है यह पुस्तक आपको उस ज्ञान रूपी समंदर में ले जाएगा जहां से आप फिर कभी लौटना नही चाहोगे।

इस पुस्तक में श्री कृष्ण सबसे हम भूमिका है और यही है जिनको भगवान का दर्जा दिया गेया है कुछ लोगों का मानना यह भी है कि श्री कृष्णा सिर्फ एक साधु पुरुष है जिनको ज्ञान का भंडार मिल गेया था, और इसी कारण वो यह सभी बातों को जानते थे।

अगर आप भी ऐसा सोचते है तो आप भी सही है और जो उन्हें भगवान मानते है वो भी सही है, क्योंकि श्री कृष्ण ने कहा है कि जो भगवान को जैसे पूजा करता है जैसे स्मरण करता है वो उन्हें उसी अबस्था में प्राप्त करता है।

और इसके लिए कोई मुकयबान बस्तु धन रत्न की अबस्यकता नही है, केवल प्रेम भाव से एक पुकार ही भगवान का दरसन कर सकता है।

जीवन जीने का कई रास्ता है पाप और पुण्य यह दोनों सीके का दो पहलू हैं, और यह संसार का नियम भी है कि पाप और पुण्य दोनों ही अपने स्थान पर सुरक्षित रहना चाहिए।

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और शायद यही कारण है कि मनुष्य पाप और पुण्य दोनों कमाता है, लेकिन मनुष्य चाहे कितना भी पाप किआ हो अगर वो समर्पण भाव से भगवान के सामने माथा टेके तो वो सही क्षण एक पुण्य आत्मा में बदल जाता है।

भगवान इतने दयालू है कि अपने भक्त का कभी नासनही होने देते, चाहे जितने भी कठिनाई आये धरती उलट पलट हो जाये लेकिन भगवान के भक्त का नाश नही हो सकता।

Bhagavad gita के अंदर आपको यह सभी जानकारी मिलेगी कैसे एक मनुष्य को जीवन जीना है, अपने पूरे जीवन काल मे क्या करना है, कैसे भगवान को प्राप्त करना है, यह सभी जानकारी स्वयं भगवान के द्वारा कही गेई है आपको जरूर पढ़ना चाहिए।

Bhagavad gita pdf in hindi

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Bhagavad gita quotes in hindi

वेसे तो भगवान ने कई बातें कही है जिससे मनुष्य खुद को स्वर्ग के ओर ले जा सकता है लेकिन हैम कुछ बातें आपके सामने रखने जा रहे है।

1: भगवान कहते है कि नरक के 3 मुख्य द्वार है वो है क्रोध, बासना और लालच।

अब जितने लोगों को यह समझ मे नही आता है उनको हम बताना चाहते है कि यह कोई दरवाजा नही है जिससे आप खोल कर नरक में प्रवेश कर सकते है, यह 3 कार्य है जिसको करते हुए आप नरक के अधीन हो जाते है।

2:  भगवान यह भी कहते है कि जिसने अपने मन को जीत लिया है, उसने पहले ही परमात्मा को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि मनको जीत लेना मतलब शांति प्राप्त कर लेना है और ऐसे में मनुष्य को सुख दुख सर्दी गर्मी, मान अपमान यह सब एहसास नही होता, सब एक से लगते है।

और ऐसे ब्यक्ति का काल भी कुछ नही बिगाड़ सकता धर्म की स्थापना ऐसे ही ब्यक्ति कर सकते है। सही मार्ग दर्शन ऐसे ही साधु पुरुष कर सकते है।

ऐसे मनुष्य केलिए दुनिया की बहू मूल्य रत्न सारे धन दौलत तुच्छ है और यह कभी भी इनके तरफ आकर्षित नही होते। [Bhagavad gita pdf in hindi]

3: अहिंसा, भगवान, गुरु, माता-पिता व गुरुजनों की पूजा करना उनकी सन्मान करना ही शारीरिक तपस्या है, इससे मनुष्य अपने जीवन मे सफलता की ओर चल पड़ता है जिसे कोई रोक नही सकता। मैन में सरलता भाव किसी भी ब्यक्ति को सबसे ऊंचा रखता है, क्रोध बिनाश की ओर ले जाता है।

4: भविष्य का दूसरा नाम है संघर्ष। मतलब संघर्ष करना ही अपने भबिस्य को उज्वलित प्रफुल्लित करना है, इसमे कर्म भी शामिल है।

अगर आज अच्छा कर्म करोगे तो कल उसका फल अबश्य ही अच्छा ही मिलेगा, भविष्य को सुधारना यह हर ब्यक्ति का कार्य होना चाहिए।

कई लोग यह सोचते है कि हमारे पास सामग्री की कमी है इसलिए हम यह कार्य करने में असफल है, लेकिन जो दृढ़ निश्चय कर लेता है वो पत्थर को भी बिना किसी अस्त्र के भेद सकता है।

5: भगवान कृष्ण ने यह भी कहा है, की (हे अर्जुन!) परमेश्वर/भगवान प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित है। यह सारे जनजाति मेरे ही बनाये हुए है और हर एक के अंदर मेरा ही अंश है।

मुझे जहां खोजोगे वहां पाओगे जैसे पूजोगे वेसे मिलूंगा, इसलिए हे अर्जुन दुनिया मे हर एक जीव की सन्मान करो।

6: एक बात यह भी कहा है कि हे अर्जुन! जो बहुत ज्यादा खाता है या कम खाता है, जो ज्यादा सोता है या कम सोता है, वह कभी भी योगी नहीं बन सकता।

योगी रात को जागते है अपने भगवान के स्मरण में विलीन रहते है, और भोगी अपने सुख को भोगता है इसलिए वो जीवन मे पीछे रह जाता है।

ज्ञान पुरुष कभी भी ज्ञान के स्रोत को अनदेखा नही करते वो हर हाल में उसे पकड़ ही रहते है।

“सबके लिए जो रात इसे संसारी नींद में सोके बिताये,
योगी जन इश रात में जागें ध्यान धरे और अरज जगाएं,
एक ही रात को भोगी और जोगी अपने अपने ढंग से बिताएं,
भोगी सोये योगी जागे, भोगी खोये युगी पाए।”

7: जो मुझे हर जगह देखता है और सब कुछ मुझमें देकता है,अर्थात दुनिया के सभी बस्तु सभी जीव सभी सामग्री यहां तक कि खुद को मुझे देखता है उसका सोच सदैव यारों से अलग होते है, और ऐसे ब्यक्ति केलिए न तो मैं कभी अदृश्य होता हूँ और न वो कभी मुझसे दूर होता है, मेरी कृपा उसपर सदैव बानी रहती है।

8: मैं हर जीव के ह्रदय में परमात्मा स्वरुप स्थित हूँ। जैसे ही कोई किसी देवता की पूजा करने की इच्छा करता है, मैं उसकी श्रद्धा को स्थिर करता हूँ, जिससे वह उसी विशेष देवता की भक्ति कर सके।

9: जो महापुरुष मन की सब इच्छाओं को त्याग देता है और अपने आप ही में प्रसन रहता है, उसको निश्छल बुद्धि कहते है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

10: जब अर्जुन अपने ही सगे सम्बन्धिओन की हत्या करने से पीछे हट जाता है और वो यह सोचने लगता है की यह तो मेरे अपने है केसे उनकी हत्या करूं तब भगवन कहेते है की हे अर्जुन जो ज्ञानी होते है, वो न तो जीवन के लिए और न ही मृत्यु के लिए शोक करते है।

जिन्हें तुम अभी अपना कहे रहे हो वोही तुम्हारे मृतु के पश्च्यात तुम्हे पिंड दान करते है और प्रेत आत्मा से छोडाते है, इहाँ कोई रोने वाला नही है, ऐसा कोई नही है जो तुम्हारे लिए जीवन भर शोक मनाए.

आत्मा अमर है वो मेरा ही अंश है उसे कभी भी कोई मार नही सकता है वो एक शारीर छोड़ कर दूसरा धारण करती है, जेसे एक ब्यक्ति के वस्त्र बदलने जेसा। इसलिए हे अर्जुन इन सभी रिस्ते नातों को भुला कर युद्ध करो।

11: हे अर्जुन! जो जीवन के मूल्य को जानता हो। इससे उच्चलोक की नहीं अपितु अपयश प्राप्ति होती है।

अर्थात मनुष्य जीवन सबसे दुर्लभ जीवन है इसे पाने केलिए देवता भी तरसते है क्यों कि यही परम धाम का एक मात्र सरल रास्ता है, लेकिन अज्ञानी मनुष्य इसे भोग विलाश में बिता देता है और जीवन की कल चक्र में घूमता रहता है।

12: तुम्हारा जीवन ना तो भविष्य में है ना अतीत में, जीवन तो इस क्षण में है। जो भी करना है वो अभी करना है, क्योंकि अगले जन्म में तुम फिर से नए कर्म करने निकल पड़ोगे।

तुम्हारा पिछले जन्म केस था या तुम्हारेको को रिस्तेदार थे यह तुम्हे ज्ञात नही होने वाला है। इसलिए हे अर्जुन जो भी कमा सकते हो वो इसी क्षण में कमाओ।

13: हे अर्जुन! जो पुरुष सुख तथा दुख में विचलित नहीं होता इन दोनों ही अबस्था में समभाव रहता है, वह निश्चित रूप से मुक्ति के योग्य है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

सीके की दो पहलू की तरह सूख दुख मनुष्य जीवन का दो पहलू है मनुष्य कभी सुख में आनंद प्राप्त जरते है तो दुख में बहुत रोता है।

परंतु जो मनुष्य यह जनता है कि सुख और दुख यह जीवन का दो डोर है वो अपने आप मुक्ति के द्वार पर पहुँच जाता है

14: अर्जुन जब बिचलित होकर यह बोलता है कि अगर आत्मा अमर है तो वो फिर से कैसे जन्म ले सकता है एयर क्यों, तबभगवानबताते है कि हे अर्जुन! तुम्हारे और मेरे या दुनिया मे सभी जीवों का अनेक जन्म हो चुके है।

परंतु में अविनाशी हूँ माया को अधीन करके काल को साथ मे लिए अपने आप को प्रकट करता हूँ इसीलिए मुझे वो सभी जन्म याद है और तुम्हे नही है।

Bhagavad gita pdf in hindi
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15: जो कर्म को फल की आशा करके करता है उसे बास्तव में फल नही मिलता है, और ना ही वो कर्म है। वो केवल स्वार्थ है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

इसलिए तुम कर्म करो फल की चिंता न करो जैसा कर्म करोगे फल भी तुम्हे वेस ही मिलेगा, यह भाग्य का लेख जोखा है और इसे कोई मिटा नही सकता।

16: जो मनुष्य कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है, वह सभी मनुष्यों में बुद्धिमान है और सब प्रकार के कर्मों में प्रवृत्त रहकर भी दिव्य स्थिति  में रहता है।

17: जो भी मनुष्य चाहे वो कितना भी पापी हो सहस्र हत्याएं किए हो, अगर वो अंतिम समय मे मुझ परमात्मा को समर्पित हो जाये तो में उसका सारे पापों का नाश कर उसे अपने सरण में ले लेता हूं उसे निष्पाप कर देता हूँ।

18: मुझे प्राप्त करने केलिए धन दौलत व यज्ञ करने की अबस्यकता नही है, केवल एक फूल अथवा चावल का आधा दान ही सही प्रेम भाव से मुझे अर्पण करे तो मैं उसमे शांतुष्ट होता हूँ।

19: यह यज्ञ बिधियाँ इन्हें मेने नही मनुष्य ने खुद बनाया है, जिसने बनाया है उसने बनादी, परंतु में उसकी मानरख कर उसके द्वारा किए गेय भक्ति को स्वीकार लेता हूँ।

जो मुझे जैसा पूजेगा जैसे खोजेगा उसे में वेसे ही मिलता हूँ।

तथा भूत प्रेत की पूजन करने वाले उन्ही के लोक में स्थान पाते है, माता पिता के पूजन करने वाले पितृ लोक में स्थान पाते है, परमात्मा की पूजा करने वाले परम धाम को प्राप्त होते है।

में अपने भक्त का अथवा उसकी भक्ति का अनादर नही करता मुझे जैसे पूजोगे जहाँपुजोगे वहां केवल में ही में हूँ और मेरा कोई सीमा नही है ना ही मैं अशीम हूँ।

20: मनुष्य जो चाहे बन सकता है, अगर वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करें तो। अर्थात अपने मन को वश में करके ध्यान केंद्रित करके कार्य किआ जाए तो वो कार्य सफल होता है।

अपने इन्द्रियों को वश में करो मन तो बिचलित है नटखट है वो इधर उधर भगता है, उसे अपने वश में करने केलिए ध्यान के मार्ग से अभ्याशकरो। [Bhagavad gita pdf in hindi]

Bhagavad gita pdf in hindi
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21: गुरु दीक्षा बिना प्राणी के सब कर्म निष्फल होते है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

22: अपने अपने कर्म के गुणों का पालन करते हुए प्रत्येक व्यक्ति सिद्ध हो सकता है।

23: यज्ञ, दान और तपस्या के कर्मों को कभी त्यागना नहीं चाहिए, उन्हें हमेशा सम्पत्र करना चाहिए। 

24: हे अर्जुन! जो बुद्धि धर्म तथा अधर्म, करणीय तथा अकरणीय कर्म में भेद नहीं कर पाती, वह राजा के योग्य है।

25: जो पुरुष न तो कर्मफल की इच्छा करता है, और न कर्मफलों से घृणा करता है, वह संन्यासी जाना जाता है। 

26: जो मनुष्य अपने कर्मफल प्रति निश्चिंत है और जो अपने कर्तव्य का पालन करता है, वहीं असली योगी है।

27: ध्यान से ही इस्वर प्राप्त हो सकते है परन्तु जो मनुष्य ध्यान केवल अपने लघ केलिए करता है वो कभी सफल नही हो सकता है.

[Bhagavad gita pdf in hindi]

28: मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।

29: जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।

30: अगर कोई प्रेम और भक्ति के साथ मुझे पत्र, फूल, फल या जल प्रदान करता है, तो मैं उसे स्वीकार करता हूँ।

31: जिसने मन को जीत लिया है उसके लिए मन सबसे अच्छा मित्र है, लेकिन जो ऐसा नहीं कर पाया उसके लिए मन सबसे बड़ा दुश्मन बना रहेगा। 

31: मैं ही लक्ष्य, पालनकर्ता, स्वामी, साक्षी, धाम, शरणस्थली तथा अत्यंत प्रिय मित्र हूँ। मैं सृष्टि तथा ब्रह्माण्ड, सबका आधार, आश्रय तथा अविनाशी बीज भी हूँ। 

32: जब भी और जहाँ भी अधर्म बढ़ेगा। तब मैं धर्म की स्थापना हेतु, अवतार लेता रहूँगा। [Bhagavad gita pdf in hindi]

33: भक्तों का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ। 

34: जो लोग निरंतर भाव से मेरी पूजा करते है, उनकी जो आवश्यकताएँ होती है, उन्हें मैं पूरा करता हूँ और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ।

35: हे अर्जुन! मैं वह काम हूँ, जो धर्म के विरुद्ध नहीं है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

36: हे अर्जुन! जो मेरे आविर्भाव के सत्य को समझ लेता है, वह इस शरीर को छोड़ने पर इस भौतिक संसार में पुनर्जन्म नहीं लेता, अपितु मेरे धाम को प्राप्त होता है। 

37: हे पार्थ! जिस भाव से सारे लोग मेरी शरण ग्रहण करते है, उसी के अनुरूप मैं उन्हें फल देता हूँ।

38: हे अर्जुन! धन और स्त्री सब नाश रूप है। मेरी भक्ति का नाश नहीं है। 

39: निर्बलता अवश्य ईश्वर देता है किन्तु मर्यादा मनुष्य का मन ही निर्मित करता है। [Bhagavad gita pdf in hindi]

40: डर धारण करने से भविष्य के दुख का निवारण नहीं होता है। डर केवल आने वाले दुख की कल्पना ही है।

41: हे कुन्तीपुत्र! मैं जल का स्वाद हूँ, सूर्य तथा चन्द्रमा का प्रकाश हूँ, वैदिक मन्त्रों में ओंकार हूँ, आकाश में ध्वनि हूँ तथा मनुष्य में सामर्थ्य हूँ। 

42: अनेक जन्म के बाद जिसे सचमुच ज्ञान होता है, वह मुझको समस्त कारणों का कारण जानकर मेरी शरण में आता है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ होता है।

43: हे अर्जुन! श्रीभगवान होने के नाते मैं जो कुछ भूतकाल में घटित हो चुका है, जो वर्तमान में घटित हो रहा है और जो आगे होने वाला है, वह सब कुछ जानता हूँ। मैं समस्त जीवों को भी जानता हूँ, किन्तु मुझे कोई नहीं जानता।

44: जो व्यक्ति निरन्तर और अविचलित भाव से भगवान के रूप में मेरा स्मरण करता है। वह मुझको अवश्य ही पा लेता है।

45: जो लोग ह्रदय को नियंत्रित नही करते है, उनके लिए वह शत्रु के समान काम करता है। Srimad bhagavad gita quotes in hindi

46: जो सब प्राणियों के दुख-सुख को अपने दुख-सुख के समान समझता है और सबको समभाव से देखता है, वही श्रेष्ठ योगी है। 

47: हे अर्जुन! क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है, तब तर्क नष्ट हो जाता है, जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है। 

48: प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को क्रोध और लोभ त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे आत्मा का पतन होता है। 

49: जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है।

50: जो लोग भक्ति में श्रद्धा नहीं रखते, वे मुझे पा नहीं सकते। अतः वे इस दुनिया में जन्म-मृत्यु के रास्ते पर वापस आते रहते हैं।

Positive thinking bhagavad gita quotes

वेसे तो भगवन ने कई बातें कही है जिसको अगर जीवन में उपयोग किआ जाये तो यीह सबसे बड़ी सुख्दयेक अनुभव होगा लेकिन आज का मनुष्य उन बातों को अनुशरण करेगा इसका कोई प्रमाण नही है, इसलिए हम आपको कुछ ऐसे खाश बाते बताने जा रहे है जिसको आप अपने जीवन में अनुशरण करोगे तो सफलता आपके तरफ भागेगा.

1: कर्म करो फल की चिंता ना करो, जो कर्म करता है और फल की अपेक्षा नही करता है और अपने कर्म में पूरा ध्यान लगा देता है उसे उसकी कर्म का फल अबश्य मिलता है, यह भाग्य की लेखा है और इसे कोई मिटा नही सकता है, जितना अर्जोगे उतना ही पाओगे.

2: ज्ञानी पुरुष अपना समय की बर्बादी नही करते है वो अपने समय को सही जगह पर ब्यातित करते है, और भोगी सदेव अपने भोग विलाश में जीवन ब्यातित करता है और अंत में उसे कुछ प्राप्त नही होता, ऐसे में मनुष्य को चाहिए की वो in भोग बिलाश से दूर अपने आप को अपने मन को एक जगह केन्द्रित करे और कर्म करे, ज्ञानी रात को जागते है और अज्ञानी तथा भोगी सोते है योग माया उनको अपने वश में कर लेती है, जिससे छोटना बहुत कठिन है.

3: मन बिचलित है उसे नये चीजें पसंद अत है और वो उसके तरफ आकर्षित होकर मनुष्य को उसके और खिचे ले जाता है, लेकिन अगर अपने मन को वश में कर लिए तो वो एक अछे सारथि की तरह आपको आपके लक्ष्य के तरफ ले जायेगा, और इसके लिए कठिन ध्यान की अबश्य्कता है.

Writer of shrimad bhagwat geeta

5151 साल पुराने श्रीमद भगवद गीता को महर्षि वेद व्याश ने लिखा था जिसमे 18 अध्याय और 700 श्लोक है, और उसके बाद अर्जुन के पोते (राजा परीक्षित) को सर्पयाग के दोरान महर्षि वेद व्याश के पुत्र (शुखा महामुनि) ने भी भगवद गीता सार सुनाया था.

निष्कर्ष:

इश लेख में हमने श्रीमद भगवद गीता की कुछ बातें आपके साथ साझा किआ है, और हमें आशा है की यह आपको पसंद आया होगा, केवल हमने कुछ बातें ही आपको बताये है, भगवन की महिमा अशीम है उनकी कही गयी बातों को एक लेख में साझा करना कठिन है, भगवद गीता एक पबित्र पुष्तक है, जिसके बारे में जानकारी राखना हर किसी के वश में नही है, इसीलिए अगर हमसे कोई भूल हो गी हो तो हमें क्ष्यमा करें, और हमें बताने का कास्ट करें की हमने क्या भूल किआ है, और अगर यह लेख आपको अछि लगी है तो इसे अपन दोस्तों के साथ साझा जरुर करें, धन्यबाद.

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